कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को बलौदाबाजार हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। अदालत ने 17 अगस्त से जेल में बंद यादव की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। यह मामला 10 जून 2024 को हुए बलौदाबाजार हिंसा से जुड़ा है, जब जैतखाम विध्वंस के विरोध में प्रदर्शन किया गया था और बाद में यह प्रदर्शन हिंसक हो गया। आरोपों के अनुसार, यादव पर भीड़ को भड़काने का आरोप था, हालांकि उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया था।
देवेंद्र यादव की अपील
सुप्रीम कोर्ट में यादव के वकील ने तर्क दिया कि विधायक घटना के दिन सभा में मौजूद थे, लेकिन वे मंच पर नहीं गए और न ही कोई भड़काऊ भाषण दिया। उनके अनुसार, हिंसा होने के समय वे घटनास्थल पर मौजूद भी नहीं थे, बल्कि कई किलोमीटर दूर भिलाई स्थित अपने घर में थे, जहां से उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की कार्रवाई राजनीतिक द्वेष से प्रेरित थी और उन्हें इस मामले में फंसाया गया था।
क्यों हुई थी हिंसा
बलौदाबाजार हिंसा मामला जून 2024 में तब सामने आया जब सतनामी समाज ने जैतखाम क्षति के विरोध में प्रदर्शन किया। यह विरोध धीरे-धीरे उग्र होता गया और प्रदर्शनकारियों ने आगजनी व तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया। हिंसा के दौरान कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, और यहां तक कि कलेक्टरेट में आग लगा दी गई, जिससे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट हो गए। प्रशासन ने इस हिंसा को लेकर विधायक देवेंद्र यादव पर भीड़ को भड़काने का आरोप लगाया था।
हिंसा के दौरान सरकारी भवनों में आगजनी
10 जून को हुए इस प्रदर्शन में कलेक्टर और एसपी ऑफिस में भी आगजनी की गई थी, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ गई। प्रशासनिक भवनों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के चलते 17 अगस्त को विधायक देवेंद्र यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। हालांकि, यादव ने लगातार यह दावा किया कि वे निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है। उनके समर्थकों ने भी उनके साथ अन्याय होने की बात कही थी।
देवेंद्र यादव के समर्थकों में खुशीदेवेंद्र यादव के समर्थकों में खुशी
अब, सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद देवेंद्र यादव को बड़ी राहत मिली है। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और उनकी दलीलों को स्वीकार करते हुए जमानत दी गई। इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था, और अब जमानत के बाद यादव के समर्थकों में खुशी की लहर है।