कम उपज दिखाए जाने से किसानों को हो रहा बड़ा नुकसान
जांजगीर-चांपा/शक्ति/कोरबा: जिले के कई गांवों में धान खरीदी को लेकर किसानों का असंतोष लगातार बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन उपजाऊ और सिंचित होने के बावजूद इस बार प्रति एकड़ धान की उपज कम दर्ज की जा रही है। जहां सामान्य परिस्थितियों में एक एकड़ से 21–22 क्विंटल उपज होती है, वहीं कई किसानों के रिकॉर्ड में मात्र 16–18 क्विंटल ही दर्ज किया गया है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का आरोप है कि पटवारी और आरआई द्वारा जमीन का सही सर्वे नहीं किया गया। वे कहते हैं कि उनकी वर्षों से अधिक उपज देने वाली जमीन को इस बार “कम उपज वाली” दिखा दिया गया, जिससे खरीदी की तय मात्रा में कटौती हो गई। कई किसानों का दावा है कि विभागीय अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। किसानों का कहना है कि कम उपज दिखाए जाने के कारण वे अपनी वास्तविक पैदावार सरकार को बेच नहीं पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में भारी कमी आ रही है।
किसानों ने मांग की है कि उनके खेतों का दोबारा सर्वे कराया जाए, जमीन की उपज क्षमता का सही मूल्यांकन किया जाए और खरीदी में की गई कटौती को तुरंत सुधारा जाए। उन्होंने जिम्मेदार पटवारी, आरआई और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग भी उठाई है। स्थानीय किसान नेताओं का कहना है कि जहां 22 क्विंटल उपज होनी चाहिए, वहां 16–18 क्विंटल दिखाकर किसानों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है और सरकार को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे जनपद, तहसील, कृषि विभाग और कलेक्टर कार्यालय में सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की तैयारी करेंगे।
