दलित परिवार पर हमला, 10 दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं, जांजगीर चांपा में कानून व्यवस्था वेंटिलेटर पर?

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नवगवा में एक अनुसूचित जाति (SC) परिवार पर सरपंच पति और उनके समर्थकों द्वारा शक्ति प्रदर्शन करते हुए हमले का गंभीर मामला सामने आया है। शिकायत के 10 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस द्वारा FIR दर्ज न किए जाने से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं, साथ ही संबंधित थाने या अजाक थाने में मामले को गंभीरता से ना लिया जाना इस बात की ओर इशारा करती है कि जिले में कानून व्यवस्था वेंटिलेटर पर है.

अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लोगों के ऊपर होने वाले अत्याचार या प्रताड़ना के मामलों पर नियंत्रण के लिए प्रदेशभर के जिलों में अजाक थाने बनाए गए हैं लेकिन जांजगीर चांपा के अजाक थाने में एक दलित परिवार को ही कानूनी सहायता नहीं मिल पा रही है.

क्या है मामला

पीड़ित सतीश कुमार घोसले ने बताया कि 13 और 15 जून 2025 को सरपंच पति परमानंद राठौर ने 50-60 लोगों के साथ उनके घर पर हमला किया। परिवार के अनुसार, हमलावरों ने जातिगत गालियां दीं, सामाजिक बहिष्कार की धमकी दी, घर में तोड़फोड़ की, और जान से मारने की धमकियां दीं। भय के कारण परिवार ने खुद को घर में बंद कर लिया। पीड़ित ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत अजाक थाने में शिकायत दर्ज की थी, लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस की प्रतिक्रिया
जांजगीर-चांपा के पुलिस अधीक्षक विजय पांडे ने कहा: “हम पहले पीड़ित पक्ष के बयान ले रहे हैं ताकि केस के हर पहलू की जांच हो सके। आरोपी को उचित समय पर बुलाकर कार्रवाई की जाएगी।”

हालांकि, पुलिस की इस धीमी कार्यशैली से पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठन संतुष्ट नहीं हैं।

सामाजिक संगठनों का आक्रोश
भीम आर्मी भारत एकता मिशन (छत्तीसगढ़) के जिला उपाध्यक्ष श्री लहरे ने कहा, पीड़ित परिवार को जातिगत आधार पर प्रताड़ित किया गया है और प्रशासन की चुप्पी इस उत्पीड़न को बढ़ावा दे रही है। यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो भीम आर्मी चरणबद्ध आंदोलन करेगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

नवगवां में SC समुदाय की संख्या कम होने के कारण पीड़ित परिवार असुरक्षा और उत्पीड़न से जूझ रहा है। लहरे ने बताया कि पीड़ित पक्ष लगातार पुलिस के चक्कर काट रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। परिवार भयभीत है और सामाजिक दबाव का सामना कर रहा है।

हमारे छत्तीसगढ़ प्रदेश का बड़ा ही दुर्भाग्य है कि यहां चने से ज्यादा उसके छिलके बिकते हैं यानी जो शख्स किसी पद पर आसीन है तो उससे ज्यादा रौला (पावर) उसके करीबी का होने लगता है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां चुनाव आयोग महिला सशक्तिकरण के लिए पंचायत मुखिया के रूप में औरतों का चयन करती है लेकिन यहां तो लगभग मामलों में महिलाएं सशक्त हो ही नहीं पातीं क्योंकि उनकी कुर्सी पर अपनी कोहनी टिकाकर खड़े होने वाले उनके पति अपना शासन चलाते हैं, नवगवां में घटी घटना में मुख्य प्रताड़ितकर्ता के रुप में सरपंच पति का ही नाम सामने आ रहा है.

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