धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, छात्र आंदोलन के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बढ़ते विरोध के बीच आया है। उनके इस्तीफे को हाल के समय की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की जानकारी सार्वजनिक करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य छात्रों के भविष्य को किसी भी प्रकार के राजनीतिक या कानूनी विवाद से दूर रखना है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम के दौरान अपनी जिम्मेदारी से कभी पीछे हटने की कोशिश नहीं की और देशहित तथा विद्यार्थियों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है।
पिछले कुछ सप्ताह से देश के कई हिस्सों में छात्र संगठन और युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक तथा परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इन आंदोलनों के दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी लगातार उठाई जा रही थी। बढ़ते जनदबाव और राजनीतिक बहस के बीच अंततः धर्मेंद्र प्रधान ने अपना पद छोड़ने का निर्णय लिया।
अपने पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें सरकार में काम करने का अवसर मिला और वे आगे भी देश तथा युवाओं की सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों का कोई भी नकारात्मक प्रभाव छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। विपक्ष ने इस घटनाक्रम को छात्रों के संघर्ष की जीत बताया है, जबकि सरकार की ओर से आगे की प्रक्रिया और नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।
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