जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ी में एक कहावत प्रचलित है—“कथरी ओढ़ के घी खाना”, जिसका आशय है कि बिना अधिकार या दूसरों के संसाधनों के सहारे ऐश करना। जांजगीर-चांपा जिले की बम्हनीडीह तहसील से सामने आया एक मामला इस कहावत को चरितार्थ करता नजर आ रहा है। यहां ग्राम पंचायत सिलादेही में राजस्व (सरकारी) भूमि से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जिसकी शिकायत जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंच चुकी है।
शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत सिलादेही स्थित खसरा क्रमांक 115/2 से 115/7 तक की राजस्व भूमि को कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से दो व्यक्तियों के नाम दर्ज करा लिया गया। आरोप है कि केवल नामांतरण ही नहीं किया गया, बल्कि इसी भूमि को आधार बनाकर बैंक से लाखों रुपये का ऋण भी प्राप्त कर लिया गया। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल सरकारी संपत्ति पर कब्जे का मामला होगा, बल्कि बैंकिंग प्रणाली के साथ धोखाधड़ी का गंभीर मामला भी माना जाएगा।
इस कथित फर्जीवाड़े में जिन दो लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें ओम प्रकाश निषाद, पिता भगत निषाद (जाति केंवट) तथा कृष्ण कुमार निषाद, पिता जगनू राम (जाति केंवट) शामिल हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोनों ने राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर सरकारी भूमि को अपने नाम दर्ज कराया और उसके आधार पर बैंक से आर्थिक लाभ उठाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने 25 जून 2026 को जांजगीर-चांपा कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार की सीएम हेल्पलाइन में भी इस प्रकरण की शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई, फर्जी दस्तावेजों को निरस्त करने तथा बैंक ऋण की भी जांच कराने की मांग की है।
हालांकि, इस मामले में अभी तक जिला प्रशासन अथवा संबंधित राजस्व विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है। आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी शेष है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

