नागपुर हिंसा: औरंगजेब की कब्र विवाद से भड़की सांप्रदायिक आग

नागपुर में हाल ही में 17 मार्च (सोमवार रात) को भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। यह विवाद औरंगजेब की कब्र को लेकर शुरू हुआ, जिसके बाद दो समुदायों के बीच तनाव बढ़ता गया। देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए और नागपुर के महाल और हंसपुरी इलाकों में हिंसा फैल गई। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है, और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

विवाद की शुरुआत और पृष्ठभूमि

नागपुर में औरंगजेब की कब्र को लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। इन संगठनों का कहना था कि औरंगजेब एक क्रूर शासक था और उसकी कब्र को सार्वजनिक स्थल से हटाया जाना चाहिए। इस मांग के चलते दो समुदायों के बीच तनाव बढ़ता गया। प्रदर्शन के दौरान अफवाहें फैलने लगीं कि एक धार्मिक ग्रंथ को जलाया गया है, जिससे गुस्सा और भड़क गया। देखते ही देखते हालात हिंसक हो गए और पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ शुरू हो गई।

हिंसा और पुलिस की कार्रवाई

सोमवार रात को महाल और हंसपुरी इलाकों में हिंसा भड़क उठी। दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए, और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। हिंसा में चार लोग घायल हो गए, जबकि कई दुकानों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। अब तक 47 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, और शहर के 10 संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

राजनीतिक बयानबाजी और तर्क-वितर्क

इस हिंसा को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि जो लोग औरंगजेब का महिमामंडन कर रहे हैं, वे देशद्रोही हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। विपक्ष ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है।

वर्तमान स्थिति और आगे की राह

फिलहाल, नागपुर के कई इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है, और हालात को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की है और सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट शेयर करने वालों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक मुद्दों को लेकर भड़काई गई हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन को और कितने सख्त कदम उठाने होंगे।

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