छत्तीसगढ़: बहुचर्चित शराब घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। घोटाले का समय 2019 से 2022 के बीच का है, जब कांग्रेस सरकार सत्ता में थी और लखमा आबकारी मंत्री थे। ईडी का दावा है कि इस घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और शराब सिंडिकेट के जरिए 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध आय अर्जित की गई। 28 दिसंबर 2022 को ईडी ने रायपुर, सुकमा, और धमतरी जिलों में लखमा और उनके बेटे से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी।
लखमा का आरोपों से इनकार
गिरफ्तारी के बाद कवासी लखमा ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए इसे “बस्तर की आवाज दबाने” की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि उनके घर की छापेमारी में न तो कोई पैसा मिला और न ही कोई कागज। उन्होंने इसे फर्जी मामला बताते हुए कहा कि उन्हें झूठे आरोपों के तहत फंसाया गया है।
सियासी बयानबाजी
लखमा की गिरफ्तारी से प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ईडी की कार्रवाई को बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए केंद्र सरकार पर कांग्रेस नेताओं को बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पूरी कांग्रेस पार्टी लखमा के साथ खड़ी है।
यह मामला अब केवल कानूनी जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि सियासी रंग ले चुका है। कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि ईडी का दावा है कि उसके पास पुख्ता सबूत हैं। लखमा जैसे वरिष्ठ नेता की गिरफ्तारी से कांग्रेस और बीजेपी के बीच तनाव बढ़ गया है। यह मामला आगामी चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।