स्कूल नियमावली पर कई सवाल शिकायत के बाद होगी कार्यवाही ?
JANJGIR CHAMPA: एक समय था जब गुरु बच्चों को जीवन का मार्ग दिखाते थे, अब वही शिक्षक शिक्षिका हर्बल लाइफ के ज़रिए वजन घटाने और सेहत बनाने की सलाहें बाँटते फिर रहे हैं। स्कूल की कक्षा अब पीछे छूट चुकी है और जगह ले ली है ऑनलाइन मीटिंग्स, शेक रेसिपी, और डाइट चार्ट्स ने। जांजगीर चांपा और शक्ति जिले में यह चलन तेजी से बढ़ा है और इसमें शामिल हैं खुद शासकीय शिक्षक शिक्षिका, जिनका असली काम बच्चों को शिक्षा देना है, न कि लोगों को हर्बल लाइफ की सदस्यता दिलवाना। ऐसा ही मामला जिले के स्थानीय स्कूल में पदस्थ शिक्षिका श्रीमती निर्मला लहरे का है, जो खूद वेलनेस कोच कहते हुए बच्चों को शिक्षा न देकर लोगोंं को फिटनेस का ज्ञान दे रही हैं और शिक्षिका लगातार अपने कर्तव्यों से हटकर अपने बिजनेस की ओर कदम बढ़ा रही हैं. सरकारी विभाग में रहते हुए कई बड़े चेहरों का नाम पहले भी सामने आया है जो अपनी जिम्मेदारी को ना निभाते हुए किसी अलग बिजनेस की राह में आगे बढ़ रहे हैं और सरकार से तनख्वा भी ले रहे हैं, इस फेहरिस्त में एक नाम निर्मला कोमल लहरे का भी है जो लेक्चरार के साथ साथ फिटनेस कोच की भी भूमिका निभाने में व्यस्त हैं.
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आप मैडम की यह फेसबुक प्रोफाइल का लिंक क्लिक करके देखिए जिसमें वे खुद कह रही हैं कि वे एक लेक्चरार होने के साथ साथ वेलनेस कोच भी हैं, वेलनेस कोच होना उनकी जिंदगी का निजी फैसला है लेकिन स्कूल के समय बच्चों को पढ़ाने का काम छोड़ कर किसी प्रोडक्ट की मीटिंग करना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ को दर्शित करता है. मैडम का वीडियो देखकर आप भी यह कह सकते हैं कि ‘अगर वेलनेस कोच बनने में ही ज्यादा फायदा नजर आ रहा है तो फिर सरकारी खजाने को लुटना छोड दें, और नौकरी छोड़ कर फुल टाइम इसी बिजनेस में आगे बढ़ें’




सूत्रों के मुताबिक, किसी भी फिटनेस प्रोडक्ट से जुड़े अधिकांश लोग शिक्षक और शिक्षिकाएं हैं जो स्कूल समय में ही ऑफिस मीटिंग करते हैं, प्रोटीन शेक पीने का तरीका बताते हैं, और लोगों को फिटनेस का पाठ पढ़ाते हैं। इतना ही नहीं, कई शिक्षक शिक्षिकाएं ऐसे भी हैं जो स्कूल में बैठकर ही ऑनलाइन प्रोडक्ट्स के सेशन लेते हैं, जबकि उसी वक्त बच्चे बिना पढ़ाई के स्कूल में बैठे होते हैं। शिक्षकों का ऐसा रवैया बच्चों के भविष्य के साथ सरासर अन्याय है.
क्या यही है हमारे देश के भविष्य का मार्गदर्शन?
जब शिक्षक ही अपने मूल कर्तव्य से भटक जाएं, तो सवाल उठता है ऐसे लापरवाह शिक्षकों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, उनका भविष्य अधर में लटका है, और जिम्मेदार शिक्षक अब नेटवर्किंग बिजनेस के धंधे में मशगूल हैं।
फिटनेस प्रोडक्ट बेचने वाली कंपनियां अमुमन अंतरराष्ट्रीय कंपनियां है, जो वेलनेस और न्यूट्रिशन उत्पाद बेचती है। लेकिन जांजगीर जिले में इसका जो स्वरूप उभर कर आया है, वह चौंकाने वाला है। शिक्षक अब खुद को वेलनेस कोच कहकर पेश कर रहे हैं और सोशल मीडिया से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप्स तक, हर जगह उनकी प्राथमिकता केवल कस्टमर बनाना रह गया है, न कि छात्र तैयार करना।
क्या शिक्षा विभाग की कोई कार्यवाही होगी
इस विषय में जिला शिक्षा अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है, जबकि यह बात लंबे समय से सामने आ रही है। जरूरत है कड़े निरीक्षण और सख्त कदम उठाने की – क्योंकि जब शिक्षक ही रास्ता भटक जाएं, तो छात्र किससे उम्मीद करें?
बच्चों का कई सवाल
‘मैडम अब हमें पढ़ाती नहीं, वो मोबाइल में कुछ मीटिंग करती रहती हैं। हम कुछ पूछते हैं तो कहते हैं बाद में बताऊँगी’। ऐसे में क्या शिक्षा सिर्फ एक साइड बिजनेस बन गई है, और असली पेशा अब नेटवर्किंग है ?
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