मां बाप के बाद दूसरा गुरु होता है शिक्षक, बच्चे एक बार अपने मां बाप की बात टाल सकते हैं लेकिन स्कूल यूनिफॉर्म में बच्चे अपने शिक्षकों की बात शायद ही टालते हों, मां बाप प्यार-दूलार के चक्कर में अपने नाबालिग बच्चों को बाइक या स्कूटी की चाबी थम्हा देते हैं या फिर बच्चा अपनी जिद्द के चक्कर में उनसे चाबी छिन कर गाड़ी चलाने लगे, लेकिन शिक्षकों का भी फर्ज बनता है कि वे नाबालिग बच्चों को बाईक चलाने से रोकें साथ ही उनको हैलमेट और यातायात के ब्यावहारीक नियमों की जानकारी भी दें.
यह वीडियो करतला ब्लॉक जिला कोरबा के फरसवानी गांव के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है. यह नाबालिग छात्र बड़े ही आराम से स्कूल प्रांगण में अपनी मोटर सायकल लेकर आया था, जहां स्कूल के शिक्षक अपनी बाईक या स्कूटी खड़ी करते हैं वहीं पर ये नाबालिग छात्र भी बड़े आराम से अपनी बाईक पार्किंग करता है लेकिन आज तक किसी शिक्षक या प्राचार्य की नजर इन नाबालिग बच्चों पर नहीं पड़ी. इन्हें अब किसी ने ना रोका ना टोका है?
फरसवानी के शिक्षकों को नाबालिग बच्चों के बाईक दौडाने से कोई एतराज नहीं है बल्की शिक्षकों की आंखों के सामने ये नाबालिग छात्र स्कूल यूनिफार्म में बाईक लेकर प्रांगण में घुस रहे हैं, इन बच्चों ने ना हैलमेट पहना है ना ही इनकी गाड़ी में पूर्ण नंबर प्लेट है.
ये नाबालिग छात्र कई बार ऐसी ही स्कूल में बाईक लेकर आते होंगे! बाईक को शिक्षकों की बाईक रखने की जगह पर खाड़ी भी करते हैं लेकिन आजतक किसी शिक्षक ने इन बच्चों को ना बाईक लाने के लिए रोका ना ही ध्यान दिया. ये नादान नाबालिग बच्चे जोश में गलती तो कर रहे हैं लेकिन होश वाले शिक्षकों को इनकी परवाह नहीं है उन्हें तो सिर्फ स्कूल में अपना रोजाना समय काटने और अपनी तनख्वाह से ही मतलब है?
