नई दिल्ली: CBI ने एक गुप्त ऑपरेशन में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क के दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ये दोनों आरोपी भारतीय युवाओं को विदेश में अच्छी सैलरी वाली नौकरी का लालच देकर उन्हें म्यांमा और कंबोडिया के कुख्यात साइबर फ्रॉड कैंपों में बेच रहे थे।आरोपियों की पहचान
- निपेंद्र चौधरी
- निलेश नरपतसिंह पुरोहित
दोनों आरोपी साउथ ईस्ट एशिया के संगठित साइबर क्रिमिनल सिंडिकेट से जुड़े हुए थे। ये युवाओं को ‘साइबर स्लेवरी’ (साइबर गुलामी) के अड्डों तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।कैसे काम करता था नेटवर्क?
CBI की जांच के अनुसार, यह नेटवर्क भारत के विभिन्न राज्यों में एजेंटों के जरिए युवाओं को संपर्क करता था। उन्हें थाईलैंड भेजा जाता था। वहां से बैंकॉक → माए सॉट के रास्ते थाईलैंड-म्यांमा सीमा पार कराकर म्यांमा के साइबर स्कैम कंपाउंड्स में भेज दिया जाता था। कुछ मामलों में कंबोडिया भी गंतव्य था।साइबर फ्रॉड कैंपों में क्या होता था?
इन कंपाउंड्स में पीड़ितों को कैदखाने जैसी स्थिति में रखा जाता था। उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते थे। उन्हें ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, फर्जी कॉल सेंटर और डिजिटल स्कैम जैसे अवैध काम करने को मजबूर किया जाता था। विरोध करने पर मारपीट और टॉर्चर किया जाता था। कई मामलों में परिवार से लाखों रुपये की फिरौती वसूली जाती थी।दोनों आरोपियों की भूमिका
- निपेंद्र चौधरी: म्यांमा तक युवाओं को पहुंचाने की पूरी लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट की जिम्मेदारी संभालता था।
- निलेश नरपतसिंह पुरोहित: भारत में एजेंट नेटवर्क चलाता था और स्कैम कंपाउंड से सीधा संपर्क रखता था।
CBI अब पूरे नेटवर्क की गहराई में जांच कर रही है। इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।यह मामला उन हजारों भारतीय युवाओं के लिए चेतावनी है जो विदेश में आसान और मोटी कमाई के सपने देख रहे हैं।
