छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने पूरे प्रदेश को चौंका दिया है। अधिकारियों ने एक पशुशाला (गाय के कोठरी) से चल रहे बड़े नकली शराब सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह वर्षों से नामी कंपनियों के ब्रांड की नकली शराब तैयार कर बाजार में सप्लाई कर रहा था।सबसे चिंताजनक बात यह है कि अवैध कारोबार किसी गोदाम या औद्योगिक क्षेत्र में नहीं, बल्कि एक साधारण पशुशाला से संचालित हो रहा था। यहां तैयार की गई नकली शराब बाजार में पहुंच रही थी।
अब बड़े सवाल
- अब तक कितनी नकली बोतलें आम लोगों तक पहुंच चुकी हैं?
- कितने लोग अनजाने में इस मिलावटी शराब का सेवन कर चुके हैं?
- क्या किसी की तबीयत बिगड़ी या स्वास्थ्य पर असर पड़ा?
ये सवाल फिलहाल अनुत्तरित हैं और विस्तृत जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।क्या यह सिर्फ रायगढ़ तक सीमित है?
यह मामला पूरे छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी चेतावनी बन गया है। अगर एक जिले में वर्षों से ऐसा नेटवर्क फल-फूल सकता है, तो अन्य जिलों में भी ऐसे गिरोह सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। अंतरजिला सप्लाई चेन, सरकारी दुकानों तक संभावित पहुंच और निगरानी तंत्र में चूक जैसे गंभीर सवाल उठ रहे हैं।जनता की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क इस बात पर जोर देता है कि किसी भी प्रकार की नकली, मिलावटी या जहरीली शराब के कारोबार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। देश में पहले भी मिलावटी शराब से सामूहिक मौतों की कई घटनाएं हो चुकी हैं।चूंकि छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में है, इसलिए निगरानी व्यवस्था, गुणवत्ता परीक्षण और आबकारी विभाग की जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं।सरकार से मांग
- पूरे प्रदेश में विशेष जांच अभियान चलाया जाए
- सभी जिलों में शराब दुकानों और गोदामों का अचानक निरीक्षण
- नकली होलोग्राम और पैकेजिंग की जांच
- आबकारी और पुलिस की संयुक्त टीमों को सक्रिय किया जाए
- जनता के लिए हेल्पलाइन शुरू की जाए
- रायगढ़ का यह मामला अब पूरे छत्तीसगढ़ की जनता की सुरक्षा से जुड़ गया है। सरकार को न सिर्फ दोषियों को सजा दिलानी है, बल्कि पूरे नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करना होगा। निष्पक्ष, पारदर्शी और तेज जांच की जनता मांग कर रही है।जनता की जान से खिलवाड़ अब और बर्दाश्त नहीं होगा।
