कंपनी से 5 लाख और पेंशन पर समझौता, मजदूर की मौत पर पीड़ित परिवार के साथ उतरी भीम रेजिमेंट

रायपुर में करंट की चपेट में आने से 30 वर्षीय शिवराम धीवर की मौत; तिरुपति मोटर्स के गेट पर शव रखकर प्रदर्शन, कंपनी मालिक अविनाश मुरारका एवं अंशुमन मुरारका से वार्ता के बाद बनी सहमति

चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के चांपा में मजदूर की करंट लगने से मौत के बाद उसके परिवार को न्याय और आर्थिक सहायता दिलाने के लिए भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ खुलकर सामने आई। तिरुपति मोटर्स चांपा में करीब 8 वर्षों से फिटर-वेल्डर के रूप में कार्यरत 30 वर्षीय शिवराम धीवर की 2 अक्टूबर को रायपुर में काम के दौरान करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। कम उम्र में परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

शिवराम को कंपनी के कार्य के सिलसिले में रायपुर भेजा गया था। वहां कार्य के दौरान हुए हादसे में उसकी जान चली गई। घटना के बाद जब शव चांपा पहुंचा तो आक्रोशित एवं दुखी परिजनों ने तिरुपति मोटर्स के मुख्य गेट के सामने शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिवार की मांग थी कि कंपनी प्रबंधन मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति और भविष्य को देखते हुए उचित सहायता उपलब्ध कराए।

प्रदर्शन के दौरान कंपनी के मालिक अविनाश मुरारका एवं अंशुमन मुरारका के साथ परिजनों की बातचीत हुई। इस दौरान इलाज में करीब 50 हजार रुपए खर्च होने तथा अंतिम संस्कार के लिए 25 से 50 हजार रुपए देने की बात सामने आई। लेकिन पीड़ित परिवार ने इसे पर्याप्त नहीं मानते हुए परिवार के भविष्य के लिए उचित आर्थिक सहायता की मांग रखी।

मदद की गुहार पर मौके पर पहुंची भीम रेजिमेंट

मामला बढ़ता देख पीड़ित परिवार ने भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेन्द्र रत्नाकर से संपर्क कर पूरी घटना की जानकारी दी और मदद मांगी। सूचना मिलते ही संगठन के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़े हो गए।

भीम रेजिमेंट के पदाधिकारियों ने कंपनी प्रबंधन के समक्ष परिवार की मांगों को मजबूती से रखा। संगठन की मौजूदगी में कंपनी मालिक अविनाश मुरारका एवं अंशुमन मुरारका तथा पीड़ित परिवार के बीच लगातार बातचीत हुई। बातचीत के बाद आखिरकार दोनों पक्षों के बीच आर्थिक सहायता और भविष्य की सुरक्षा को लेकर सहमति बनी।

5 लाख का चेक, PF और पत्नी को ₹9 हजार मासिक पेंशन

सहमति के अनुसार मृतक शिवराम धीवर के परिवार को 5 लाख रुपए का चेक, मृतक के PF की राशि तथा उसकी पत्नी को हर महीने 9 हजार रुपए पेंशन देने पर सहमति बनी। इन शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच लिखित एग्रीमेंट भी किया गया और उसकी प्रति पीड़ित परिवार को सौंपी गई।

शिवराम की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया था। ऐसे में आर्थिक सहायता के साथ मृतक की पत्नी को मासिक पेंशन देने की सहमति से परिवार को भविष्य के लिए कुछ आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद है।

पीड़ित परिवार की आवाज बनी भीम रेजिमेंट

पूरे मामले में भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेन्द्र रत्नाकर एवं संगठन के पदाधिकारियों ने पीड़ित परिवार के साथ खड़े होकर उनकी मांगों को कंपनी प्रबंधन तक पहुंचाया। संगठन के हस्तक्षेप के बाद बातचीत आगे बढ़ी और आर्थिक सहायता तथा पेंशन को लेकर लिखित सहमति बनी।

प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेन्द्र रत्नाकर ने कहा कि मजदूर की मौत सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि उसके पीछे पूरे परिवार के भविष्य का सवाल होता है। किसी भी मजदूर के परिवार को संकट की घड़ी में अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ जरूरतमंद और पीड़ित परिवारों की आवाज मजबूती से उठाती रहेगी।

शिवराम धीवर के परिवार को मिली आर्थिक सहायता और पेंशन की सहमति के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट किया कि संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े होकर उनकी मांगों को उठाने से समाधान की दिशा में बातचीत आगे बढ़ सकती है।

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