भारतमाला का बंद रास्ता बना अवैध रेत परिवहन का रास्ता!प्रशासन के जागने से पहले धड़ल्ले से दौड़ वाहन.

जांजगीर-चांपा। भारतमाला परियोजना के तहत निर्माणाधीन रायपुर-धनबाद आर्थिक गलियारे के बिलासपुर-उरगा खंड तथा उरगा-बलौदा और पंतोरा-बिलासपुर मार्ग पर आम नागरिकों और निजी वाहनों की आवाजाही पर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग को बंद किया गया है। लेकिन प्रशासन के इस प्रतिबंध के बीच एक अलग ही तस्वीर सामने आ रही है।

स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी के अनुसार, दिन के उजाले में जहां आम नागरिकों के लिए इस मार्ग पर आवाजाही प्रतिबंधित है, वहीं रात के अंधेरे और सुबह प्रशासनिक अमले के सक्रिय होने से पहले बड़े वाहन बेधड़क इस रास्ते से गुजर रहे हैं। इनमें 12 चक्का वाहन और हाइवा जैसे भारी वाहन शामिल हैं, जिनके माध्यम से कथित तौर पर अवैध रेत का परिवहन किया जा रहा है।

सवाल यह है कि जिस सड़क को आम जनता की सुरक्षा के नाम पर बंद किया गया है, उसी रास्ते पर भारी वाहनों की आवाजाही कैसे हो रही है? यदि इस मार्ग पर आम नागरिकों और निजी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है, तो फिर भारी वाहनों को किसकी अनुमति से गुजरने दिया जा रहा है? क्या इन वाहनों के पास परिवहन संबंधी वैध दस्तावेज और अनुमति है?

यह मामला केवल सड़क पर प्रतिबंध के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध रेत परिवहन और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है। आखिर रात के अंधेरे में इन वाहनों की आवाजाही किसके संरक्षण में हो रही है? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर कार्रवाई केवल दिन के समय तक ही सीमित है? जबकि इस रास्ते में पूर्व में हुए हादसों में कई लोगों की जान तक जा चुकी है

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और प्रतिबंधित मार्ग से कथित अवैध रेत परिवहन करने वाले वाहनों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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