रजनी मानिकपुरी, संवाददाता
जांजगीर-चांपा दिनांक: 06-08-2025: छत्तीसगढ़ में साय सरकार द्वारा बिजली बिल हॉफ योजना को बंद करने का निर्णय जनता के लिए अत्याचार साबित हो रहा है। सरकार ने अब केवल 100 यूनिट तक की खपत वाले उपभोक्ताओं के लिए ही बिजली बिल हॉफ करने का फैसला लिया है, जिससे प्रदेश के अधिकांश उपभोक्ता इस राहत से वंचित हो गए हैं। नए निर्देश के मुताबिक, 100 यूनिट से अधिक खपत पर पूरा बिल देना होगा और कोई छूट नहीं मिलेगी। कांग्रेस सरकार ने अपने 5 साल के कार्यकाल में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 400 यूनिट तक की खपत पर बिजली बिल हॉफ योजना लागू की थी, जिससे 44 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ मिला और प्रत्येक उपभोक्ता को 40 से 50 हजार रुपये की बचत हुई। इस योजना में 600 यूनिट तक की खपत पर भी पहले 400 यूनिट पर बिल आधा होता था, लेकिन अब यह सुविधा खत्म कर दी गई है। पिछले महीने ही सरकार ने बिजली दरों में चौथी बार वृद्धि की, जिसमें घरेलू खपत पर 10 से 20 पैसे, गैर-घरेलू पर 25 पैसे और कृषि पंपों के लिए 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई। डेढ़ साल में घरेलू बिजली दरों में कुल 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि हो चुकी है। इसके अलावा, बिजली कटौती और लो वोल्टेज की समस्या ने जनता को परेशान कर रखा है, जबकि कांग्रेस सरकार में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाती थी। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की मोदी सरकार की गलत नीतियों, जैसे कोयले पर चार गुना ग्रीन टैक्स, रेलवे माल भाड़े में वृद्धि, और अडानी की कंपनी से महंगे कोयले की खरीद, ने बिजली उत्पादन की लागत बढ़ाई है। इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। स्मार्ट मीटर के नाम पर अनाप-शनाप बिल और अडानी की कंपनी द्वारा प्रीपेड मीटर लगाने की तैयारी को भी कांग्रेस ने जनता को लूटने का प्रयास बताया। कांग्रेस पार्टी ने इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ पूरे प्रदेश में आंदोलन की चेतावनी दी है। पार्टी का कहना है, “कोयला हमारा, पानी हमारा, जमीन हमारी, फिर भी हमें महंगे दर पर बिजली क्यों?”
