हम लोकतांत्रिक और संवैधानिक देश में रहते हैं जहां सभी को जीवन जीने के लिए सामान आधिकार मिलते हैं, हमारी न्यायव्यवस्था का ढांचा भी सभी को बराबर न्याय देने के आधार पर ही बनाया गया है लेकिन अपने साथ हुई किसी घटना को स्मरण में रखते हुए सोचिए कि क्या कई मामलों में आपको सही न्याय मिला? अगर मिला होगा तो फिर आप भाग्यशाली हैं. क्योंकि दर-बदर की ठोकरे खाने के बाद भी लोगों को न्याय तो नहीं मिल पा रहा है. हां जिनके पास पॉलिटिकल या फिर अधिकारियों का सपोर्ट है उनको न्याय जल्द मिलते हुए देखा जा सकता है. कुछ दिनों पहले आपने पगडंडी खबर में पढ़ा कि जांजगीर चांपा जिले के बलौदा विकासखंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय रामपुर में एक शिक्षिका प्रमिला मिरी को पुष्पा ओग्रे नाम की एक अन्य शिक्षिका ने सबके सामने घसीट घसीट कर मारा. और गाली गलौच करते हुए वहां से चली गयीं. अपने साथ हुए अत्याचार की शिकायत लेकर पहले तो प्रमिला मिरी BEO साहब के पास पहुंची, फिर DEO और फिर JD के दफ्तर तक न्याय की गुहार लगाने पहुंची लेकिन किसी अधिकारी ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया. और अब तक मिरी मैडम को न्याय नहीं मिल सका. पीड़िता ने मामले की कानूनी शिकायत भी की लेकिन वर्दी वालों ने ये मामला विभागिय है कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया. इधर विभाग ने भी मामले को फाइलों के बंडल के साथ बांध कर कोने में फेंक दिया है. अब सवाल यह है कि विधिवत चलने के बाद भी पीड़िता को न्याय नहीं मिल रहा है तो फिर उनके पास रास्ता क्या बच जाता है. जिस न्याय व्यवस्था को वे बच्चों को पढ़ा कर कानून के दायरे में रहने की शिक्षा देती हैं वहीं कानून या कायदा उन्हीं के काम नहीं आएगा तो फिर कोई इस देश में न्याय मिलता है इस बात पर भरोसा कैसे करेगा? क्या शिक्षा विभाग पीड़िता के साथ और भी ज्यादा प्रताड़ना होने का इंतजार कर रहा है? अगर नहीं तो फिर अब तक न्याय क्यों नहीं मिला?
भ्रष्टाचार में डूबे छत्तीसगढ़ में न्याय कहां मिलता है?
