बस्तर पंडुम 2025 – नक्सल मुक्त गांवों को मिलेगी एक करोड़ की निधि: अमित शाह

बस्तर पंडुम 2025 समापन

दंतेवाड़ा में आयोजित ऐतिहासिक समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर पंडुम को जनजातीय संस्कृति का प्रतीक बताते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की बात कही। इस उत्सव में कुल 47,000 कलाकारों ने भाग लिया।

बस्तर अब विकास की आवाज से पहचाना जाएगा

गृह मंत्री ने कहा कि अब बस्तर बंदूक से नहीं, विकास और संस्कृति की आवाज से जाना जाएगा। उन्होंने जनजातीय आराध्य देवताओं को नमन किया और महाराजा प्रवीर चंद भंजदेव एवं बाबू जगजीवन राम को श्रद्धांजलि दी।

1 करोड़ की निधि नक्सल मुक्त गांवों को

शाह ने घोषणा की कि जो गांव नक्सलियों के आत्मसमर्पण में सहयोग करेंगे, उन्हें “नक्सल मुक्त गांव” घोषित कर 1 करोड़ रुपये की विशेष विकास निधि दी जाएगी। इससे गांवों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा का विकास होगा।

बस्तर पंडुम बनेगा राष्ट्रीय महोत्सव

उन्होंने बस्तर पंडुम को 2026 से राष्ट्रीय महोत्सव के रूप में मनाने की घोषणा की। अगले वर्ष आयोजन को 12 श्रेणियों में विस्तारित किया जाएगा और देशभर के आदिवासी कलाकार इसमें भाग लेंगे।

लोकल उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच

‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के तहत बस्तर के बेल मेटल, टेराकोटा, लकड़ी शिल्प और गोदना कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने की योजना है।

हथियार छोड़ने वालों को पुनर्वास, न मानने वालों पर सख्ती

शाह ने स्पष्ट किया कि जो नक्सली हथियार डालेंगे, उन्हें सरकार सुरक्षा और सम्मान देगी। लेकिन हिंसा का रास्ता न छोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

हर गांव में स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल सेवाएं

गृह मंत्री ने बताया कि हर गांव में स्कूल, दवाखाना, आधार कार्ड, राशन कार्ड और स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था की जाएगी ताकि गांव-गांव विकास से जुड़े।

बस्तर का सपना: शिक्षा और प्रशासन में भागीदारी

उन्होंने कहा कि असली विकास तब होगा जब सुकमा से सब-इंस्पेक्टर, कांकेर से कलेक्टर और बस्तर से डॉक्टर, बैरिस्टर और वैज्ञानिक निकलेंगे। अब बस्तर को कलम और कंप्यूटर से आगे ले जाने का वक्त है।

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